काशीपुर। शिक्षा के अधिकार और बच्चों के भविष्य को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। इक ओंकार ग्लोबल एकेडमी पर आरोप है कि फीस जमा नहीं होने के चलते कुछ बच्चों को परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया। स्कूल के इस कथित फैसले को लेकर अभिभावकों में नाराजगी है और स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अभिभावकों का आरोप है कि फीस को लेकर बच्चों को परीक्षा से बाहर करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। उनका कहना है कि फीस संबंधी समस्या का समाधान अभिभावकों से बातचीत कर निकाला जा सकता था, लेकिन इसका खामियाजा सीधे बच्चों को भुगतना पड़ा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या फीस का विवाद बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा से जोड़ना उचित है? अगर किसी परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और वह समय पर फीस जमा नहीं कर पा रहा, तो क्या उस बच्चे को परीक्षा से वंचित करना समाधान है?
अभिभावकों का कहना है कि बच्चे स्कूल में पढ़ने और परीक्षा देने जाते हैं, उन्हें फीस विवाद का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। परीक्षा से रोकने की कार्रवाई से बच्चों के मानसिक मनोबल पर भी असर पड़ सकता है।
मामले को लेकर अब अभिभावक स्कूल प्रबंधन से जवाब मांग रहे हैं। साथ ही सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या शिक्षा विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर जांच करेगा?
हालांकि, पूरे मामले में इक ओंकार ग्लोबल एकेडमी प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। अब निगाहें स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर हैं।