
काशीपुर। कोतवाली काशीपुर पुलिस ने एक बेहद संवेदनशील अपहरण मामले का सफल खुलासा करते हुए 10 दिन से लापता युवती को राजस्थान के अजमेर से सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने आरोपी मोहम्मद जफर उर्फ आर्यन उर्फ छोटू (23), निवासी कुमाऊं कॉलोनी, कचनागाजी, काशीपुर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की इस कार्रवाई में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि न तो युवती के पास मोबाइल फोन था और न ही आरोपी के पास, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मैनुअल इंटेलिजेंस और लगातार फील्ड वर्क के दम पर दोनों तक पहुंच बनाई।
पुलिस के अनुसार 5 जुलाई 2026 को युवती को बहला-फुसलाकर ले जाने के संबंध में कोतवाली काशीपुर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधम सिंह नगर के निर्देश पर तत्काल विशेष पुलिस टीम गठित की गई।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि तकनीकी सर्विलांस से कोई मदद नहीं मिल पाएगी क्योंकि दोनों के पास मोबाइल फोन नहीं थे। ऐसे में पुलिस टीम ने कई राज्यों और जनपदों में 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया। इसके साथ ही स्थानीय मुखबिर तंत्र, मैनुअल सूचना तंत्र (ह्यूमन इंटेलिजेंस) और लगातार फील्ड वर्क के माध्यम से महत्वपूर्ण सुराग जुटाए गए।
लगातार दस दिनों तक चले अभियान के बाद पुलिस टीम राजस्थान के अजमेर पहुंची, जहां से युवती को सकुशल बरामद कर लिया गया। युवती के बयान और विवेचना के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64A एवं 351(2) भी बढ़ाई गई। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर विधिक कार्रवाई करते हुए न्यायालय में पेश किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामला अत्यंत संवेदनशील था और क्षेत्र में इसे लेकर जनभावनाएं भी प्रभावित थीं। इसके बावजूद पुलिस ने पूरी गंभीरता, संयम और पेशेवर तरीके से कार्रवाई करते हुए न केवल युवती को सुरक्षित बरामद किया, बल्कि पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था भी पूरी तरह बनाए रखी।
- इस सराहनीय अभियान में SHO हरेंद्र चौधरी, SSI नवीन बुधानी, SI कौशल भाकुनी, कांस्टेबल सुरेंद्र, कांस्टेबल धीरज, कांस्टेबल किरण मेहता, SPO माजिद और SPO राहुल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
काशीपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील मामले में अफवाहों पर विश्वास न करें और सोशल मीडिया पर भ्रामक या भड़काऊ सामग्री साझा करने से बचें। किसी भी प्रकार की सूचना तत्काल पुलिस को उपलब्ध कराएं, ताकि समय पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।